हाल ही में Bloomberg की आयी एक ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिमी Chongqing में देश ने एक्सपेरिमेंट के आधार पर इसकी शुरुआत कर दी है और 2021 और 2025 के बीच एक मेगावाट-लेवल सोलर फैसिलिटी 2030 तक और बाद में बाकी बड़े जनरेटर्स को स्पेस में स्थापित किये जाने का प्लान किया जायेगा। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक ऐसा भी कहा जा रहा है कि चीन 2050 तक गीगावाट-लेवल सोलर जनरेटर भी ला सकती है।
ऐसी उम्मीद है कि China का सोलर पावर स्टेशन पृथ्वी से 36,000 kilometres के अल्टीट्यूड पर हो। China Academy of Space Technology Corporation, Engadget इस बात का दावा करती है कि ग्रह पर सोलर इंस्टालेशंस से इंटेंसिटी का छह गुना ज़्यादा एनर्जी सप्लाई होगी। वहीँ इस बात पर भी सवाल उठ रहा है कि चीन स्पेस में सोलर पावर को पृथ्वी तक कैसे पहुंचाएगा?
सुनने में तो पावर को वायरलेस तरीके से ट्रांसमिट करने की यह टेक्नोलॉजी बहुत ही दिलचस्प लग रही है लेकिन यह एक बहुत बड़ा चैलेन्ज होने जा रहा है। चैलेन्ज दूरी का है। 2015 में जापान ने भी कुछ ऐसी ही टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया था और साथ ही California Institute of Technologyने भी पिछले साल इस बात की घोषणा की थी कि उसने प्रोटोटाइप तैयार किया था जिससे लाइट वेट टाइल्स के इस्तेमाल से स्पेस से सोलर एनर्जी को कैप्चर और ट्रांसमिट किया जा सकता है।
China Academy of Space Technology के Vice President, Li Ming का कहना है कि इस लक्ष्य को पूरा करने के बाद चीन दुनिया का पहला ऐसा देश बन जायेगा जो स्पेस आधारित सोलर फार्म तैयार करेगा।
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